नया वर्ष आ चुका है. इसके आने के उमंग में कुछ ऐसा करें, जोनीरसता में भी सरसता का अनुभव करा दे. ऐसा तभी संभव है जब हम जीवन से प्यार करना सीख जायेंगे. सभी इंद्रियों का सचेतन अवस्था में होना मानव जीवन की बड़ी उपलब्धि है. आइए, इस उपलब्धि का हर्ष मनाएं, जीवन के अनुराग और विराग को पूर्णतः भोगे.
इस सत्य से हम मुंह नहीं मोड़ सकते कि बीमारी से जूझता कोई अजीज हो या किसी अपने की मौत हमें तोड़ देते हैं. पिछले दो वर्ष से कोरोना ने हमारे जीवन को उदासी और अवसाद से भर दिया है, पर इस स्थूल शरीर से मोह करना भी तो एक भ्रम है. जितनी जल्दी इस भ्रम को समझ जायेंगे, निराशा हम पर हावी नहीं होगी. समय मरहम का काम करता है जो जख्म की पीड़ा भुलाकर खुशियों की सीपियां बिखेर देता है. उन सीपियों को झोली में भरने का संकल्प लें. आइए, सोचें कि जो बीत गयी, सो बात गयी. जो हासिल हुआ वह अच्छा था तो अब बेहतर हो, कुछ बुरा हुआ तो अब अच्छा होगा. नववर्ष में बच्चे एकेडमिक परफॉर्मेंस सुधारने का संकल्प लेते हैं, तो गृहणियां वजन कम कर के निरोग रहने का कोई समय से ऑफिस पहुंचने का संकल्प लेता है, तो कोई अपनी कार्यप्रणाली सुधारने का.
संकल्प-विकल्प और तार्किक क्षमता में प्रकृति का सबसे सबल प्राणी मनुष्य है. बीते वर्ष का विश्लेषण करना वह जानता है, क्या खोया, क्या पाया, क्या अधूरा रह गया? क्या सोचा था और क्या हो गया? संकल्प लेना एक चेतनासंपन्न प्राणी का
लक्षण है और उसका क्रियान्वयन करना सजग होने का प्रमाण. कुछ लोग तो बड़े-बड़े संकल्प लेते हैं, पर उनका पालन करने में पिछड़ जाते हैं. इसलिए संकल्प भी अपनी सामर्थ्य और साधन के अनुसार लेना चाहिए, जिसे पूरा करना हमारे वश में हो, अन्यथा हताशा हाथ लगती है. फिर जीवन की खुशियां परायी हो जाती हैं. उद्यमी ही लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं और जब लगे कि हमने अपनी मंजिल पा ली है, तो अपने आप को शाबाशी दें, जश्न मनाएं. खुश होने की किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करना चाहिए.
इस बार के संकल्प में प्रकृति से जुड़े रहने का भी संकल्प लें जिसमें पर्यावरण का हित और परोपकार की भावना निहित हो. अपने घर में पौधारोपण करें. जब वह पौधा बड़ा होकर फूले फलेगा, तब बिलकुल वैसी ही प्रसन्नता होगी जैसी अपने बच्चों को बढ़ते देख कर होती है. अपने जीवन काल में पेड़ लगाने का संकल्प बहुत नेक है. इससे पर्यावरण की रक्षा होगी और आने वाली पीढ़ियों को एक हरे-भरे ग्रह की सौगात मिलेगी. इन दिनों एक और संकल्प जुड़ गया है, मास्क लगाना, हाथ धोना और दूरी बना कर बातचीत करना. कोरोना को जड़ से मिटाने के लिए सरकार और डॉक्टर की सलाह मानना भी एक संकल्प होगा.
आशा और विश्वास कभी टूटने न पाए. आखिर जिस रोशनदान से सूरज की रश्मियां आती हैं, उसी के पीछे तो रजनी भी गहराती है. तो, खुश रहने का संकल्प लें. हर दिन एक उत्सव की भांति हो और बेहतर की उम्मीद बनी रहे.

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