प्रतिवर्ष 17 नवंबर को अंतराष्ष्ट्रीय छात्र दिवस मनाया जाता है. विश्व में जहां कहीं भी सत्ता और सामाजिक परिवर्तन हुए हैं, उनमें छात्रों की बड़ी भूमिका रही है. ये इतिहास बदलते भी हैं और रचते भी हैं. राष्ट्र के प्रति छात्रों का योगदान बहुत बड़ा और विस्तृत है. वे अपने योगदान द्वारा राष्ट्र को उन्नत और समृद्ध बना सकते हैं. पर छात्र तभी योगदान दे पते हैं, जब वे अपनी निष्ठा और सत्याचरण को श्रेष्ठ और महान बनाकर इस कार्य क्षेत्र में उतरते हैं. राष्ट्र के प्रति छात्रों का कर्म क्षेत्र बहुत ही अद्भुत और अनुपम है, क्योंकि वे शिक्षा ग्रहण करते हुए भी समाज और राष्ट्र हित के प्रति अपना अधिक से अधिक योगदान दे सकते हैं
यह सोचते हुए विचित्र आभास होता है कि शिक्षा और राजनीति दोनों पहलुओं को साथ लेकर छात्र कैसे आगे बढ़ सकते हैं, क्योंकि विद्या और राजनीति का संबंध परस्पर भिन्न और विपरीत है . अतएव, छात्र का अपने समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान देना और इसका निर्वाह करना अत्यंतविकट और दुष्कर कार्य है. फिर भी एक समाज चिंतक और राष्ट्रभक्त छात्र विद्याध्ययन करते हुए भी अपना कोई न कोई योगदान अवश्य दे सकता है. अगर कोई छात्र ऐसा करता है, तो निश्चित ही वह महान राष्ट्रधर्मी, राष्ट्र का नियामक और राष्ट्र नायक हो सकता है. छात्रों का अपने राष्ट्र और समाज के प्रति बहुत ही दिव्य और अनोखा योगदान होता है. उन्हें अपने राष्ट्र के प्रति योगदान देने के लिए अपनी शिक्षा का पूर्ण रूप से निर्वाह करना चाहिए और अपने उद्देश्य के प्रति जागरूक होना चहिए .
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट उपलब्धियों को अर्जित करके ही छात्र राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठ हो सकते हैं. आदर्श और कर्तव्यनिष्ठा का पाठअच्छी तरह से याद करके ही उन्हें राष्ट्र और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को निभाना चाहिए, अन्यथा वे कहीं के नहीं रहेंगे. एक चिंतनशील छात्र ही राष्ट्र औरसमाज के प्रति उत्तरदायी हो सकता है. राष्ट्र और समाज को एक रूप देने के लिए आदर्श छात्र को महान राष्ट्र नायकों और राष्ट्र की महान विभृतियों के जीवन से सीखना चाहिए और उस सीख के साथ राष्ट्र निर्माण की दिशा में अग्रसर होना चाहिए, तभी राष्ट्र निर्माण के प्रति छात्रें का योगदान महान और उच्च माना जा सकता है.
राष्ट्र के प्रति योगदान देने वाले छात्रों को केवल नेतागिरी या लच्छेदार वाक्यों का वाचन नहीं करना चाहिए, अपितु उन्हें सब प्रकार के कार्यों की सही-सही जानकारी भी होनी चाहिए, अपने राष्ट्र के धर्म, संस्कृति के रक्षक और हितैषी छात्र इसकौ आन-बान-शान पर मर मिटने की सौगंध के साथ ही राष्ट्र के प्रति योगदान देने में सबल और समर्थ हो सकते हैं. छात्र देश के कर्णधार और अविभाज्य अंग हैं. इनके द्वारा निष्ठापूर्वक किये हुए. प्रत्येक कार्य देश के मान-सम्मान और गौरव को बढ़ाते हैं. वहीं, इनके गलत कार्यों से देश की छवि खराब होती है. छात्रों की प्रत्येक गतिविधि की परछाईं देश के चरित्र में स्पष्ट झलकती है. छात्रों की प्रगति ही देश की प्रगति है. इसे हमें भली-भांति समझना होगा.

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