बिना इंटरनेट सब सूना






प्रतिवर्ष 29 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट दिवस मनाया जाता है. इंटरनेट की शुरुआत 1969 में हुईं थी जब अमेरिका में सेना के लिए एक कंप्यूटर नेटवर्क तैयार किया गया था, ताकि परमाणु युद्ध शुरू होने की स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सके.आधुनिकीकरण के इस तकनीकी युग में जहां नये आविष्कारों, साधनों ने जीवन को आसान बना दिया है, वहीं कई कठिनाइयां भी पैदा की हैं, आज की दुनिया में इंटरनेट बिना सब सून है.


पिछले लगभग दस वर्षों में दिन दूनी, रात चौगुनी गति से इसका उपयोग बढ़ा है. जहां इंटरनेट ज्ञान प्राप्त करने के एक नये साधन के रूप में उभरा है, वहीं इसने हर चीज को आसानी से सुलभ बनाकर कई वर्जनाओं को तोड़ा है. इससे स्वतंत्रता की नयी परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं. हम व्यक्तिगत दायरे से बाहर अधिक मुखर होकर देश, समाज और दुनिया के समक्ष अपने विचार व्यक्त करने लगे हैं. एक तरफ जहां इंटरनेट अकेलेपन का साथी है, तो दूसरी तरफ उसने इंसान को और भी अकेला बना दिया है. उल्लेखनीय है कि दुनिया में 3.9 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में इसके 56 करोड़ यूजर्स हैं. वर्ष 2018 में दुनियाभर में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 51.2 फीसदी थी, जबकि 1995 में महज 10.6 करोड़ लोग ऑनलाइन थे. इंटरनेट भारतीय अर्थव्यवस्था में सालाना 7.10 लाख करोड़ रुपये का योगदान देता है ।


स्मार्टफोन के बगैर इस तरह बेचैन होने लगते हैं जैसे उनका कोई अंग गायब हो. इनमें 96 फीसदी सवेरे उठकर सबसे फहले सोशल मीडिया पर जाते हैं. 70 फीसदी युवाओं का कहना है कि वे ईमेल और सोशल मीडिया को चेक किये कौर जी नहीं सकते. दस देशों के 10,000 लोगों पर वैश्विक प्रबंधन परामर्श कंपनी एटी कियनी द्वारा किये गये शोध में यह बात सामने आयी है कि 53 फीसदी भारतीय हर घंटे इंटरनेट से जुड़े रहते हैं जो 51 फीसदी के वैश्विक औसत से ज्यादा है. इनमें 77 फीसदी लोग सोशल नेटर्वर्किंग साइटों पर रोजाना लॉग इन करते हैं, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में किये गये एक अध्ययन के अनुसार, इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि वे वास्तविक जगत में रहते हैं, न कि वर्चुअल वर्ल्ड में.


इंटरनेट आज तमाम समस्याओं का एकल समाधान बन चुका है. यह ज्ञान और मनोरंजन का मंच तो है ही, संचार का त्वरित माध्यम भी है, एक समय ऐसा था जब प्रख्यात कवि मायकोवस्की ने कहा था, 'अपनी कविताओं के त्वरित संचार के लिए कवियों के पास हवाई जहाज होना चाहिए.' आज यदि वे जीवित होते, तो संचार की इस द्वतगामी प्रणाली को देख कितना प्रसन्न होते ! देखा जाये, तो इंटरनेट एक ऐसी दुधारी तलवार के रूप में हमारे सामने आया है जिसके दोनों तरफ खड़ा इंसान खतरे की जद में है. या शायद यह एक ऐसा धारदार चाक है, जिसका इस्तेमाल इंसान अपने विवेक से सब्ज़ी काटने में कर सकता है या होशो-हवास गंवाकर किसी का गला करने के लिए .

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