सेल में कवि, डिस्काउंट में कविता




देश में कविता उत्पादन का सर्वोच्च रिकॉर्ड दर्ज हुआ है. राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के बैनर तले धड़ल्ले से एक ही जिले के कवियों का मोहल्ले में कार्यक्रम करवाया जा रहा है. कविता एक ऐसी फसल है, जिसकी बुआई कटाई का कोई मौसम नहीं होता. कवि एक ऐसा किसान है, जिस पर मौसम की मार का कोई प्रभाव भी नहीं पड़ता, इसी वजह से कृषि प्रधान देश वाया कुर्सी प्रधान के पथ से होते हुए कवि प्रधान बन गया है. इन दिनों ट्रेन में यात्रा करते समय हर बोगी में एक या दो कवि तो मिल ही जाते हैं. इतना ही नहीं हमारे शहर में लगने वाले गधों के मेले में भी कवि सम्मेलन हो रहा है. अब तो सिर्फ शादियां ही बची हैं, जहां कविताओं का पढ़ा जाना बाकी है. यदि एक मात्र कवि को यहां बुला लिया जाये, तो वह शाम में बारात निकलने से लेकर आधी रात में फेरे होने तक के समय में अपनी एक कविता तो पूरी सुना ही देगा.



कवियों की व्यापक रेंज देखते हुए ख्याल आता है कि मानो कवियों की सेल लगी हुई है. जहां कविता पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है. मंच संचालक से लेकर छोटे-बड़े आयोजक तक मोल भाव करते देखे जा रहे हैं. अरे! भैया, कवि जी मिलेंगे ? हां जी बिल्कुल मिलेंगे? कैसे दिये? आप दर्जन से लेंगे या किलो से? आप दोनों के भाव तो बताइए, हमारे यहां रेट को लेकर निश्चिंत रहिये, सबसे रीजनेबल यहीं मिलेगा. और वैसे भी कवि हैं, कोई टमाटर तो हैं नहीं, जो महंगे हो जायें. अच्छा तो वो ऊपर दायीं ओर वाला लॉट दिखाइए. छोटू, ऊपर से एक लाख वालाब्रां डेड लॉट उतारना. 



यह देखिए एक वरिष्ठ कवि, तीन कनिष्ठ कवि, दो नवोदित कवि और एक कवयित्री. अभी मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड में यही चल रहा है. आप एक बार लेंगे, तो हर सीजन में यहीं आयेंगे. आप पैसे ज्यादा बता रहे हैं. क्या बतायें भैया, एक तो महंगाई बहुत बढ़ गयी है, ऊपर से सीजन का समय है. वैसे आपका कितना बजट है? यही कोई पचास हजार! इतने में तो चाइना का कवि आयेगा, जिसकी कविता की कोई गारंटी नहीं रहेगी. चोरी की पढ़ दे, कुछ कह नहीं सकते.



आप लॉट रहने दीजिए, सिंगल पीस दिखा दीजिए, वो वाला जो सामने रखा है, गेरुआ कलर का. यह आपके बजट में नहीं पड़ेगा, अभी इसकी डिमांड बहुत है. यह पाकिस्तान, चाइना और अब तालिबान पर क्या कविता सुनाता है. अच्छा तो उसके पास में बायीं ओर वो लाल वाला, अच्छा वो लाल, हां यह सस्ते में मिल जायेगा. इसे वैसे भी कोई नहीं पूछता, क्योंकि यह पेट्रोल, रसोई गैस, सब्जी के दाम पर बड़े सवाल करता है. एक मिनट रुकिये, वो हरा वाला दिखाइए इसकी गारंटी हम नहीं लेंगे, कुछ भी हुआ तो जिम्मेदारी आपकी होगी. तो फिर वो मल्टी कलर वाला कवि, वो कैसा रहेगा? यह तो लल्लनटॉप है. जो कहोगे, वही पढ़ेगा, माला डालो तो दिन को रात और लिफाफा दो तो गेरुआ, हरा, नीला, सफेद सब रंग में रंग जायेगा. इसकी एक स्पेशियलिटी है, इसे क्या बोलना है कि बजाय क्या नहीं बोलना है, यह पता है. तब तो इसे ही पैक कर दीजिए,

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