कोरोना काल में सबने कितना कुछ झेला है. न मिलना, न जुलना. घर में बंद रह कर तरह-तरह के डर का सामना करना. उन दिनों सेमिनार, शादी-ब्याह या तो स्थगित कर दिये गये या हुए भी तो उपस्थिति नगण्य ही रही. आमंत्रण भी चुनिंदा को ही भेजे गये, क्योँकि सरकार की तरफ से संख्या तय कर दी गयी थी. अब कोरोना कुछ कम हुआ है, तो दोबारा से बहुत सी चीजें शुरू हो गयी हैं.
इन दिनों भी शादी का मौसम है. हर रोज किसी न किसी के विवाह का आमंत्रण आ रहा है. अच्छा भी लग रहा है कि बीते दिन अतीत की बात होने जा रहे हैं, लोग डर को भुला कर फिर से रोजमर्रा के काम में लगने लगे हैं, उत्सव और पर्व भी इसी दैनंदिन प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में एक भारी बदलाव देखने में आ रहा है. कोरोना से पहले तक लोग आमंत्रण देने आते थे. किसी न किसी वाहन से आते थे. छपे हुए कार्ड लाते थे. कुछ उपहारों का लेन-देन, खान-पान भी होता था. मिठाई, फल, मेवे, कपड़े यानी जैसी जिसकी हैसियत, उसी तरह के उपहार भी, लेकिन अब अधिकांश आमंत्रण व्हॉट्स एप पर आ रहे हैं. ऐसे में वाहनों का, मिठाई, मेवे, फूलों, उपहारों का जो व्यापार चलता था, उसमें कितनी कमी आयी होगी.
सोचती हूं कि अपने यहां विवाह का बाजार अरबों रुपये का है. लोग शादियों पर अनाप-शनाप खर्च करते हैं. हर अगले साल यह खर्चा बढ़ जाता है. इसमें रीति-रिवाज के नाम पर तो खर्चा होता ही है, दिखावे की भी बड़ी भूमिका होती है. यों इस तरह के दिखावे से नफरत है, पर बात इन दिनों के चलन की हो रही है. कार्ड देने के बहाने जो नाते- रिश्तेदार, मित्र-परिजन आते थे, उनसे हजार तरह की बातें होती थीं. दुख-सुख साझा किये जाते थे. लड़के वाले या लड़की वाले के बारे में चर्चा होती थी. समय पर आने या कुछ दिन पहले आने का आग्रह भी शामिल होता था,
औपचारिकता के लिए ही सही, जिसके घर जाते थे, वह यह जरूर पूछता था कि मेरे लायक कोई काम हो, तो बताइए, ऐसे में न केवल भाईचारा, पारिवारिकता, मेल-मिलाप, बल्कि कुछ पुराने शिकवे, शिकायतें भी होती थीं. जितने लोग, उतनी ही शिकायतें. उन्हें दूर किया जाता था, तो कुछ नयी जन्मती थीं.
दरअसल, कई बार इस तरह के समारोह को लोग दूसरे से अपनी शिकायत करने का सही अवसर भी मानते हैं. इन बातों को करने का सही समय तभी माना जाता है, जब कोई आपको निमंत्रित करने आया हो. इनमें शिकायत के अलावा दूसरे की खिंचाई और मनोरंजन का तत्व भी छिपा होता है. ऐसे में जब व्हॉट्सएप पर निमंत्रण आया हों, तो इन सब बातों का तो जैसे समय ही नहीं रहा.
इस तरह के निमंत्रण पर भी लोग जा-आ रहे हैं, शामिल हो रहे हैं, दावत खा रहे हैं और शगुन भी दे रहे हैं, लेकिन कई लोग मजाक में कहते हैं कि जब निमंत्रण फोन पर आया है, तो शगुन भी फोन पर ही भेज देंगे!

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