साढ़े तीन सौ साल पुराना पेड़ || 350 years old tree in Hindi || हिंदी


बहुत बड़ा घर नींबू, नाशपाती, सेब,तेज पत्ता आदि के पेड़ों और फलों से भरा बेशुमार रंग-बिरंगे फूल, तितलियों की तरह इठलाते. घर में गुलाबी कमल से भरा एक छोटा सा तालाब इसमें मेंढक रहते हैं, रात में खूब टरते हैं. एक सांप भी आता है यहां. सांप की मौजूदगी मेंढकों के डर को और अधिक बढ़ा देती है, चारों ओर हरियाली से भरी ऊंची-ऊंची पहाड़ियां भी इन पर नजर रखती हैं. दूर तक फैले पीले फूलों से भरे सरसों के खेत, इसमें चार चांद लगा देते हैं. यह सर्न, फ्रांस में काम करनेवाली मशहूर वैज्ञानिक अर्चना शर्मा का घर था. वह गॉड पार्टिकल टीम का हिस्सा भी थीं.

अचानक नजर एक बहुत ऊंचे, सीधे खड़े पेड़ पर पड़ी जिसे देखकर कुतुब मीनार के संबंध में कही जाने वाली बात याद आ गयी कि ऊपर की मंजिल देखने पर कई बार लोगों की टोपी गिर जाती है, मेरी नजरें इस सीधे खड़े पेड़ से हट ही नहीं रही थीं. उसके पत्ते हिल हिलकर चारों ओर का जायजा ले रहे थे. पता चला कि यह पेड़ साढ़े तीन सौ साल पुराना है. बताया गया कि नगर पालिका के अधिकारी बार-बार इसे काटने की बात कहते हैं, लेकिन हमने तो यह घर इसी पेड़ के कारण खरीदा था नहीं कटवायेंगे, तो भारी जुर्माना देना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर पेड़ गिर पड़ा, तो चोट लग सकती है. कोई हादसा हो सकता है, लेकिन हम इसे नहीं कटवाना चाहते. किसी पेड़ का जीवन बचाना भी कितना कठिन है. सिर्फ मनुष्य की दया पर निर्भर,

उस पेड़ के तने की मोटाई कई बड़ी टंकियों के बराबर थी. इसलिए उसका आलिंगन भी आसान नहीं था. मैं उसे घूम-घूमकर छूकर देखने लगी, चूमने लगी. मुझसे पहले न जाने कितने लोगों ने इस पेड़ को छुआ होगा. महसूस किया होगा. क्या इसे उन सबकी याद होगी. आखिर क्यों न होगी. पेड़ भी तो आत्मीयता और ऊष्मा को पहचानते हैं. उनकी शिराओं में भी तो हलचल होती है, इस घर में न जाने कितने लोग रहे होंगे. कैसे होंगे, कहां होंगे, क्या पता. क्या पेड़ को उनकी याद आती होगी. वह उन्हें पहचानता होगा. उनके न रहने का दुख मनाता होगा. जब भी नये मालिक आते होंगे, इसे भी पुरानों के बिछड़ने की कमी महसूस होती होगी.

पेड़ों का जीवन भी कैसा होता है. एक जगह खड़े-खड़े उम्र बीत जाती है. न कहीं आने के न जाने के. बस जड़ों के सहारे खड़े ही रहो, गति को धरती की सबसे बड़ी शक्ति माना जाता है, मगर पेड़ों के जीवन में उसकी जगह भी कहाँ बहुत साल पहले अमेरिका में रहने वाले एक परिजन ने रेड वुड जंगल के पेड़ों की तस्वीरें भेजी थीं. वे चार हजार साल पुराने बताये जाते हैं. एक पेड़ के तने के बीच से सड़क गुजरती है और गाड़ियां दौड़ती हैं. काश, तीन सदी से अधिक पुराना यह पेड़ अपने इन बांधवों से मिल सकता. मगर कैसे पैर तो हैं नहीं कि चला जायेगा, न ही पंख हैं कि उड़ सके. मोबाइल मेल भी नहीं करना जानता कि कोई संदेश भेज सके.

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