पिछले दिनों सेना में काम करनेवाला घोड़ा 'विराट' रिटायर हो गया. बताया जाता है कि जर्मनी से आये इस घोड़े ने तेरह वर्ष सेना में काम किया. हालांकि, इस बेचारे को क्या पता होगा कि अब इसके साथ क्या होने वाला है. एकाएक इसकी दुनिया बदलने वाली है. प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस घोड़े को गणतंत्र दिवस के अवसर पर विदाई भी दी.
जब से इस खबर को पढ़ा है, घोड़े की तस्वीरें देखी है, तब से दिल बैठा जा रहा है. आनेवाले दिनों में इस घोड़े का जीवन कैसा होगा, कौन इसे पालेगा, कहां जायेगा, क्या पता ? आम तौर पर सेना में जो घोड़े, कुत्ते होते हैं, उनका जीवन बहुत राजसी होता है, उनके खान-पान, स्वास्थ्य, अनुशासन सबका ध्यान रखा जाता है. लेकिन सेना से रिटायर होने के बाद यदि कोई इन्हें ले भी जाये, तो उसके लिए इन्हें इतने राजसी ठाट से पालना बहुत मुश्किल होता है. ये पशु भी नयी परिस्थिति के अनुकूल अपने को ढाल नहीं पाते.
इनके जीवन में सबकुछ बदल जाता है रहन-सहन, खान-पान, यहां तक कि मालिक भी. मुझे बहुत पहले किसी ने बताया था कि सेना से अवकाश प्राप्त घोड़ों को गोली मार दी जाती है, नहीं जानती कि सच क्या है. लेकिन यदि ऐसा है, तो बहुत अफसोसजनक है, जो पशु इतने दिनों तक बिना रुके सेवा करता रहा हो, उसके रिटायर होते ही उसकी एक-एक सांस इतनी भारी क्यों लगने लगती है. आखिर मानवता का तकाजा तो यह नहीं है, जब तक ये जिए, इनकी देखभाल का इंतजाम करना कोई बड़ी बात तो नहीं है.
लेकिन जब बूढ़ों को वानप्रस्थ देकर हम मनुष्य की जिम्मेदारी से ही मुक्त होना चाहते हैं, तब घोड़ों और कुत्तों की सही देखभाल की बात कौन करे. सच तो यह है कि बूढे मनुष्य और पशु से जितनी जल्दी पिंड छूटे, उतना ही अच्छा बूढ़ों की दुर्दशा की खबरें हम प्रायः पढ़ते ही रहते हैं. बहुत वर्ष पहले घोड़ों के जीवन से संबंधित दो उपन्यास पढ़ा था. एक था- ब्लैक ब्यूटी और दूसरा था- ब्लिट्ज, इन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते थे कि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए इन पशुओं के प्रति कितना अत्याचार करते हैं.
ये दोनों उपन्यास विदेशी पृष्ठभूमि के जरूर हैं, लेकिन इन्हें पढ़कर यही पता चलता है कि दुनियाभर में मनुष्य ने पशुओं के प्रति जितने और जितनी तरह के अत्याचार किये हैं, उनकी मिसाल मिलना दुर्लभ है. कई वर्ष पहले किसी ने डॉल्फिन्स के बारे में लिखा था कि आज तक किसी डॉल्फिन ने मनुष्य पर कभी आक्रमण नहीं किया है, कई बार तो इसने मुसीबत में फंसे मनुष्यों की मदद की है. मगर फिर भी उन्हें तरह-तरह से बेरहम तरीकों से मारा जाता है.
आनेवाले दिनों में इस घोड़े का क्या होगा, इसे जानने की उत्सुकता है. यही नहीं, यह कामना भी है कि इसे एक अच्छा घर और मालिक मिले, जिससे कि सेना में रहकर इसने परिश्रम के जो वर्ष गुजारे हैं, जितनी कदमताल की है, उनका सही प्रतिफल मिले यह भी अपने बचे हुए वर्ष चैन से बिता सके.

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